Monday, 20 May 2019

"नन्दावत हे बईला गाड़ी"

बइला गाड़ी या जेला हिंदी में बैलगाड़ी तको कहिथे,पुरखा मन के ऐति ओती, इंहा उँहा आये जाए के बने थेभा राहय।चाहे टाकीज में कोई फिलिम लगत हे, तीर के बस्ती में नाचा, गम्मत मड़ई कहीं कुछु।दु ठन बइला ला फांद के बइला गाड़ी में पैरा ला बिछातीस अउ सियान मन चलते बने।
रात रात कन मंझनी मंझनिया कतको बेर होय,डूंगुर डूंगुर बइला गाड़ी चलात जावत हे।हमर बबा कर ले तो हम अतको सुने हन कि जब शहर ले 44 किमी दूर गंवई मा बबा मन रहय, ता सन्तोषी माता के फिलिम देखे बर दुरुग आय।
गाय गरु मन बर पेरा, चारा डोहारे बर,कंही कुछु लेगे लाने बर बने तको काम आय,बिना पेट्रोल डीजल के चलतीस, ना कोनो परदूसन ना कोनो अवाज,चलत हे अपन डुंगुर डूंगुर...
का के जरूरत हे,बईला गाड़ी चलाये बर, एक झन चलइया,दु ठन गोल्लर,हाथ मे लउठी,ताहन चलन दे।
बइला गाड़ी के तको अपन अलगे मज़ा हे सियान, फेर आजकल कमति देखे ला मिलथे।गांव मन मे मिल तको जहि,फेर पहिली अतेक प्रयोग में नई आय।अब पुरखा के गोठ भर में सुन सकथन इखर बारे में।
नंदाये के कारन कतको हो सकत हे, पहिली तो चलइया होना,दूसरा आजकल लोगन मन कुकुर पाले के जादा शौकीन हे ता बईला कोन पालही,तीसरा हमर कर तो टेक्टर हे, काबर बइला गाड़ी चलाबो।
अउ कंही ना कहीं समय के अभाव तको बइला गाड़ी के नंदाये के कारन आय,भले एककन पइसा लगे ते लगे, फेर समय बचना चाही।
नन्दावत हे बइला गाड़ी,फेर पुरखा के जिनिस मन के जानकारी नवा लइका मन ला तको होना चाही,ता बईला गाड़ी के सवारी तहूँ मन तो करे होहु?

चित्र साभार : शुभम ध्रुव
फोटोग्राफर के प्रोफाइल पर विजिट करें।

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